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इलाहाबाद हाईकोर्ट बार एसोसिएशन ने प्राइवेट स्कूलों की पुस्तकों की मनमानी कीमतों को लेकर CM से की कार्रवाई की मांग

इलाहाबाद हाईकोर्ट बार एसोसिएशन ने प्राइवेट स्कूलों की पुस्तकों की मनमानी कीमतों को लेकर CM से की कार्रवाई की मांग
इलाहाबाद उच्च न्यायालय हाईकोर्ट बार एसोसिएशन प्राइवेट स्कूलों की पुस्तकों की मनमानी कीमतों को लेकर मुख्यमंत्री को लिखे पत्र से कार्रवाई की मांग की है, हाईकोर्ट बार एसोसिएशन ने प्रदेश के निजी विद्यालयों द्वारा हर वर्ष पुस्तकों में अनावश्यक बदलाव किए जाने के मुद्दे को गंभीरता से उठाया है, इस संबंध में एसोसिएशन ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है, एसोसिएशन ने अपने पत्र में कहा है कि प्रदेश के अधिकांश निजी विद्यालय अभिभावकों पर अनावश्यक आर्थिक बोझ डाल रहे हैं, विद्यालय प्रबंधन द्वारा पुस्तकों की कीमतों को मनमाने तरीके से बढ़ाया जा रहा है और अभिभावकों को केवल निर्धारित दुकानों से ही पुस्तकें खरीदने के लिए बाध्य किया जाता है, इससे प्रतिस्पर्धा समाप्त हो जाती है और अभिभावकों को अधिक कीमत चुकानी पड़ती है, पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि कई विद्यालय हर वर्ष पुस्तकों का नया संस्करण जारी कर देते हैं, जबकि पाठ्यक्रम में कोई विशेष बदलाव नहीं होता, केवल कुछ अध्यायों में मामूली परिवर्तन करके नई पुस्तकें अनिवार्य कर दी जाती हैं, जिससे अभिभावकों को हर साल नई किताबें खरीदनी पड़ती हैं, बार एसोसिएशन ने इसे अभिभावकों के साथ अन्यायपूर्ण बताया है और कहा है कि अधिकांश परिवार हर वर्ष इस अतिरिक्त खर्च को वहन करने में सक्षम नहीं हैं, मुख्यमंत्री से की गई प्रमुख मांगें इस प्रकार हैं, 1.निजी विद्यालयों द्वारा पुस्तकों की कीमतों पर नियंत्रण हेतु सख्त नियम बनाए जाएं, 2.विद्यालयों को किसी विशेष विक्रेता से ही पुस्तकें क्रय करने के लिए बाध्य करने पर रोक लगाई जाए, 3.पुस्तकों के सेट को कम से कम 5 वर्षों तक अपरिवर्तित रखने हेतु स्पष्ट नियम निर्धारित किए जाएं, 4.केवल आंशिक (चैप्टर स्तर) परिवर्तन के आधार पर नई पुस्तकें अनिवार्य करने की प्रथा पर रोक लगाई जाए, 5.नियमों का उल्लंघन करने वाले विद्यालयों के विरुद्ध कठोर दंडात्मक कार्यवाही सुनिश्चित की जाए, 6.अभिभावकों के हितों की सुरक्षा हेतु एक प्रभावी निगरानी तंत्र (मॉनिटरिंग सिस्टम) स्थापित किया जाए,
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