मिर्ज़ापुर विंध्याचल माँ विंध्यवासिनी देवी के धाम में छह दिवसीय चैती होली शुरू
मिर्ज़ापुर विंध्याचल विश्व प्रसिद्ध माँ विंध्यवासिनी देवी के धाम में छह दिवसीय चैती होली शुरू हो गया , मां विन्ध्यवासिनी दरबार में अति प्राचीन परंपरागत छह दिवसीय होली चैती गायन दशकों पुरानी परंपरा के अनुसार मंदिर प्रांगण में रंगभरी एकादशी से होली चैती गायन का आरंभ होता है , तथा होलीका दहन के दूसरे दिन बैशाख कृष्णपक्ष प्रतिपदा को समाप्त होता है , शास्त्रीय शैली में होने वाले इस आयोजन की महत्ता इसलिए और बढ़ जाती है क्योंकि तमाम रागों जैसे खमाज , पीलू , काफी , देश इत्यादि में निबद्ध होली गीतों को जत , दीपचंदी , तीनताल , झपताल , सीतारखानी , कहरवा, दादरा इत्यादि तालों में गाया जाता है , उत्कृष्ठ साहित्यों से सजी होली गीतों को गुरु , शिष्य परंपरा का अनुसरण कर स्थानीय कलाकारों द्वारा ही इसकी प्रस्तुति की जाती है , बुधवार रंगभरी एकादशी की संध्या पर आयोजन का आरंभ मां की बंदना पर आधारित होलीगीत अम्बे विंध्य शिखर होली , खेलत श्री जगदम्ब" से हुई , इसके बाद एक से बढ़कर एक होलीगीतो की प्रस्तुति से कलाकारों ने प्रांगण में उपस्थित श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया , पंडा समाज के बैनरतले आयोजित होने वाले कार्यक्रम का शुभारंभ पंडा समाज के अध्यक्ष पंकज द्विवेदी, मंत्री भानु पाठक , कोषाध्यक्ष तेजन गिरी ने मां के चरणों में अबीर गुलाल अर्पित करके किया, वशिष्ठ नारायण पाण्डेय , धर्मेन्द्र भट्ट , प्रदीप पांडेय , रविशंकर शास्त्री , शिवशक्ति पांडेय , मोहनजी स्वामी , हरी नारायण पाण्डेय ने जहां अपने मधुर कंठों से गायन की अद्भुत प्रस्तुतियां दी तो वही मास्टर तौलन शहनाई , रवि द्विवेदी तबला , रंगनाथ ढोलक तथा रजत शर्मा में ऑर्गन पर संगत से होलीगीतों में चार चांद लगा दिया , इस अवसर पर पंडा समाज के पूर्व अध्यक्ष राजन पाठक , ओमप्रकाश मिश्र , कुलदीप पांडेय , राजेश्वर पंडा , तरुण पांडेय , रत्नेश भट्ट , जितेन्द्र भट्ट इत्यादि के साथ दर्जनों की संख्या में दर्शनार्थी श्रोतागण भी होलीगीतों का आनंद लेते नजर आये ,