मिर्ज़ापुर के साहित्यकार इरफान कुरैशी ने अपनी लेख में बताया पिता का योगदान
मिर्ज़ापुर के साहित्यकार इरफान कुरैशी ने आज फादर्स-डे पर लिखे लेख में हर बच्चों को बताया की जीवन मे पिता का क्या योगदान होता है , साहित्यकार इरफान कुरैशी ने लिखा कि सामाजिक परिवेश में पारिवारिक नैतिकता को बनाए रखने में पिता का बहुत बड़ा योगदान होता है , देखा जाए पिता मूल रुप से परिवार का मुखिया होता है , पिता घर आंगन होता है , जिससे हमें हवा पानी रोशनी ऊर्जा सब मिलती है , आज पिता दिवस के शुभ अवसर पर दुनिया के तमाम पिता को सलाम करता हूं , इसके साथ साथ उन बेटों को भी हिदायत देता हूं कि अपने पिता के रहते हुए अपने पैर पर खड़े हो जाइए , पिता अपने कंधे पर बैठा कर अपने से ऊंची दुनिया को देखाता है तो बेटा को लगता है कि हम पिता से बड़े हो गए , जबकि ऐसा नहीं है पिता इसलिए कंधे पे बैठता है कि कल तुम हमें अपने कंधे का सहारा दोगे बुढ़ापे में जिससे परंपरा बनी रहे , सौभाग्य है उन बेटों को जिनके पिताजी जीवित हैं , पिता मूल धन हैं और हम उनके साखें हैं , पिता नदी है और हम उसके धारे हैं , उन्हीं के बदौलत हम देखते चांद सितारे हैं , पिता जब धूप में और मां चूल्हे पर जलती है , तब कहीं जाकर ही औलाद पलती है , जो हम तुम नहीं कर सकते क्योंकि पिता के पसीने की एक बूंद की भी कीमत औलाद ताउम्र नहीं अदा कर सकती , जो सत्य है इसलिए हम राष्ट्रपिता को भी नमन करते हैं ,