सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला लेनदेन के ठोस सबूत के बिना नहीं चलेगा करप्शन का केस
देश की सबसे बड़ी अदालत सुप्रीम कोर्ट ने भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों में बड़ा फैसला सुनाते हुए कहा कि केवल अधिकारों के दुरुपयोग या फैसलों की त्रुटि को भ्रष्टाचार नहीं माना जा सकता, अगर रिश्वतखोरी का आरोप है तो उसके लिए स्पष्ट लेन-देन के ठोस सबूत होने चाहिए, सिर्फ प्रशासनिक फैसलों की गलती को करप्शन नहीं कहा जा सकता, लेन-देन की पुष्टि होना जरूरी है, वरना केस खारिज होगा, गुजरात के एक अधिकारी के केस में सुप्रीमकोर्ट ने ये फैसला दिया है, जिसमें एक सरकारी अधिकारी पर मछली पालन की टेंडर प्रक्रिया में गड़बड़ी के आरोप लगे थे, हाईकोर्ट ने उनके खिलाफ भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम के तहत केस दर्ज किया था, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि रिश्वत या निजी लाभ का कोई स्पष्ट सबूत नहीं होने पर इसे करप्शन नहीं माना जा सकता ,