मिर्ज़ापुर मड़िहान विधायक नही देख सकते किसी का दुःख दर्द अपनी हैसियत से बढ़कर करते है जनता की समाज सेवा
मिर्ज़ापुर जनपद के अंदर वैसे तो तमाम जनप्रतिनिधि है, जो सरकार की तमाम योजना को ही जनता तक ठीक से नही पहुंचा पाते, तो वही मिर्ज़ापुर जनपद में एक ऐसे भी दयावान जनप्रतिनिधि है जो किसी काम मे कमीशन खोरी दलाली तो दूर, वह अपने सैलरी तक को जनता की मदद करने में उड़ा देते है , ये लिखे सभी शब्द हवाओ में नही आँखों देखा और कानो सुना लिखा है , जी हाँ हम बात कर रहे है, मिर्ज़ापुर जनपद के 399- मड़िहान विधानसभा क्षेत्र के दयावान, संघर्षवान, गरीबो के हमदर्द, उनके सुख दुःख के साथी, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सच्चे सिपाही सरकार के पूर्व उर्जा राज्य मंत्री व मड़िहान विधायक रमाशंकर सिंह पटेल की, जो किसी के भी दुःख दर्द नही देख सकते, बस विधायक जी को इस कलयुगी दुनिया मे पीड़ित के दर्द को सही महसूस हो जाये, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सेना के सच्चे सिपाही का हर काम आज तक जो भी रहा है सब बेमिसाल रहा, गरीबो के घर जाकर उनकी टूटी चारपाई पर बैठना, सड़क के किनारे किसानों के साथ पटरियों पर बैठ उनसे वार्ता करना, दलित के घर जाकर कुछ भी खा पी लेना, क्षेत्र में जो भी विकास कार्य कराना कभी कोई शिकायत नही मिलना, गरीब परिवार के लड़की-लड़को की शादी में हर प्रकार के सामानों की दिल खोलकर मदद करना, गरीब बीमारों के इलाज के लिए खुद से हाथ बढ़ाकर मदद करना, जैसे तमाम कार्य है जो अपने आप मे बे-जोड़ और बेमिसाल है , सच्चाई कोई भी जानने के लिए मड़िहान विधायक रमाशंकर सिंह पटेल के विधानसभा क्षेत्र में दौरा कर क्षेत्रवासियों से सीधी बात कर जान सकता है , जो अपनी हैसियत से बढ़कर जनता के बीच करते है समाज सेवा, रहा कुछ लोगो के विरोध का तो सभी जानते है, जो भी अन्य पार्टी के लोग होते है, वो हर जगह नुक्स निकालकर अपना विरोध जता ही देते है , चाहे उनके लिए धरती पर क्यों न स्वर्ग उतार दिया जाए , बरहाल पूर्व मंत्री व मड़िहान विधायक रमाशंकर सिंह पटेल वैसे तो ठंड को देखते हुए अब तक हजारो गरीबो को ठंड से बचाने के लिए कम्बल वितरण कर चुके है, आज जनता दरबार के दौरान उनके निवास शुक्लहा पर कुछ गरीब महिलाएं को ठंड से ठिठुरते देख अपने नरम दिल को नही रोक सके ठंड से ठिठुर रहे लोगो को तत्काल अंदर से कम्बल लेकर ओढ़ा दिया , किसी शायर ने क्या खूब कहा है कि सच्चाई छुप नही सकती बनावट की उसूलो से, कि खुशबू आ नही सकती कभी कागज के फूलों से